About the Journal

शोधार्थी मात्र एक शोध पत्रिका ही नहीं वरन एक बौद्धिक आन्दोलन है.इसका उद्देश्य समाज विज्ञान के हिंदी भाषी छात्रों को ज्ञान की स्पर्धा में अंग्रेजी भाषी छात्रों के साथ सशक्त प्रतियोगिता करने योग्य बनाना है. हिंदी भाषी और गैर-अंग्रेज़ी भाषी छात्र प्रायः अपने विषय में होने वाले गंभीर ज्ञान से वंचित रह जाते हैं क्योंकि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर होने वाले विषयगत विमर्शों और वाद-विवादों का संचालन अंग्रेजी में होता है. इस प्रकार ज्ञान की अद्भुत सम्पदा पर मुट्ठी भर अंग्रेजी बोलने वालों का जैसे एकाधिकार सा हो जाता है. यह ज्ञान के क्षेत्र में एक प्रकार का उपनिवेशवाद जैसा लगता है. राजनीतिक उपनिवेशवाद को आज बौद्धिक उपनिवेशवाद ने विस्थापित कर दिया है और हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं.और इसका दुष्परिणाम हमारे गैर-अंग्रेज़ी भाषी छात्रों को भुगतना पड़ रहा है. इन चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय विद्वानों के एक समूह द्वारा शुरू की गई शोध पत्रिका एक छोटी पर सशक्त पहल है. 

शोधार्थी को एक बौद्धिक आन्दोलन बनाने में हमें आप सभी के सहयोग की आवश्यकता है.